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Napunsakta ka homeopathic ilaj नपुंसकता के घरेलू उपचार

Napunsakta ka homeopathic ilaj

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Napunsakta ka homeopathic ilaj नपुंसकता के घरेलू उपचार

Napunsakta ka homeopathic ilaj हस्त मैथुन, अप्राकृतिक मैथुन, अति मैथुन तथा गलत आहार विहार के कारण नपुंसकता आती है। इसमें मूत्रेन्द्रिय शिथिल हो जाती है , जिस कारण मैथुन की इच्छा कम या कभी-कभी नष्ट हो जाती है। शिश्न छोटा, पतला, टेढ़ा तथा निस्तेज हो जाता है। स्तम्भन शक्ति का आभाव हो जाता है। कामेच्छा की कमी अथवा उसके नष्ट हो जाने को ही नपुंसकता कहते हैं।

Napunsakta ka homeopathic ilaj उपाय  :-
  • सूखे सिंगाड़े की गिरी ऐंव मखानों की ठुर्री दोनों को बराबर लेकर कूट-छानकर रख लें।  6 ग्राम की मात्रा में लेकर और बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर 250 ग्राम धारोष्ण ( तुरंत का काढ़ा हुआ ) दूध के साथ फंकी लें। ऐसा 10-15 दिन प्रयोग करते रहने से नपुंसकता दूर होती है।
  • प्याज का रस 6 ग्राम, अदरक का रस 6 ग्राम, शहद 6 ग्राम एव घी 3 ग्राम चारों को मिलाकर निरंतर 30 दिनों तक प्रयोग करने से नामर्द भी मर्द बन जाता है अथवा प्याज का रस और शहद बराबर मिलाकर पियें।
  • बेलपत्र का रस 6 ग्राम और शहद मिलाकर लिंग पर लगाने से लिंग पुष्ट और बलवान होता है।
  • सनाय का चूर्ण 1 ग्राम गाय के घी में मिलाकर सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है।
  • वंशलोचन तथा सत्व गिलोय समान मात्रा में लेकर कूट लें और कपड़छन कर रख लें।  प्रतिदिन 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ लें। वीर्य गाढ़ा होता है और खुद से स्खलित नहीं होता है।
  • कौच के छिले बीजों का चूर्ण 6 ग्राम, तालमखाने के बीजों का चूर्ण 6 ग्राम तथा मिश्री 12 ग्राम इन तीनों को मिलाकर रख लें। 6 ग्राम की मात्रा में लेकर धारोष्ण ( तुरंत का काढ़ा हुआ ) गाय के दूध के साथ पियें।
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