संग्रहणी रोग की आयुर्वेदिक चिकित्सा | संग्रहणीय का इलाज

संग्रहणी रोग क्या है

संग्रहणी रोग होने पर, सुबह बिना दर्द के हल्का और फेनदार खडि़या मिट्टी (रंग का) पानी के समान दस्त आता है। समय के साथ ये रोग बढ़ता जाता है और सायंकाल भोजन के बाद तुरंत दस्त भी आता है। मगर इससे रोगी को कोई कष्ट महसूस नही होता है, इसके बाद पेट फूलना, बदहजमी आदि होने लगते हैं। इन सब कारणों की वजह से रोगी धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।

संग्रहणी रोग का इलाज

  1. 50 ग्राम आँवला लेकर उसको पानी में भिगो दें। नरम होने पर थोड़ा काला नमक मिलाकर सिल पर पीसकर जंगली बेर के बराबर की गोलियाँ बना लें। सुबह और शाम को एक-एक गोली चूसने से अतिसार, पेचिश तथा संग्रहणी आदि में लाभ मिलता है।
  2. दो पके केले 150 ग्राम दही के साथ खाने से आँतों की खराबी दूर होकर, पेचिश,संग्रहणी में लाभ होता है।
  3. पक्का पपीता अथवा कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर निरन्तर खाते रहने सेसंग्रहणी नष्ट होती है।
  4. बरगद का दूध लेकर उसे नाभिस्थान में भरने से फायदा होता है। हर प्रकार कीसंग्रहणी की अचूक दवा है।

ध्यान रखें– ये घरेलू उपाय है। वैसे तो इसका कोई नुक्सान नहीं होता मगर फिर भी डॉक्टरी सलाह ले लें तो ज्यादा अच्छा होगा। किसी अनहोनी के लिए हम जवाबदेह नहीं हैं।

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