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बच्चा नशा तो नहीं करने लगा है, कैसे पता करें

बच्चा नशा तो नहीं करने लगा है

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बच्चा नशा तो नहीं करने लगा है, कैसे पता करें

बच्चे जब बड़े होने लगते हैं तो किसी चीज़ को लेकर उनकी जिज्ञासा भी बढ़ने लागती है. ऐसे में बच्चों को साही राह पर चलाना बड़ों की ज़िम्मेदारी होती है. उन्हें ये सुनिश्चित करना चाहिए की बच्चा किसी गलत संगत में ना पड़े.

अक्सर ये देखा गया है की नशे की लत कम उम्र में ही लग जाती है. आज के समय की बात करें तो बच्चों को नशे की लत 8th क्लास से ही लगने लगी है. शुरुवात में तो बच्चा एक दुसरे को देख कर ऐसा करता है मगर बाद में उसे नशे की लत लग जाती है.

बच्चा नशा तो नहीं करने लगा है, कैसे पता करें

बच्चा नशा तो नहीं करने लगा है, कैसे पता करें

आप चाहे अपने बच्चे पर कितना भी भरोसा करते हैं, मगर वह घर से बहार कम से कम 6-7 घंटे रहता है. इससे गलत संगत की सम्भावना बनी रहती है. अब सवाल ये उठता है की कैसे पता करें बच्चा नशे की गिरफ्त में है या नहीं. नशा करने पर बच्चे में ये लक्षण हो सकते हैं.

  1. अचानक से बच्चा माउथ फ्रेशनर ( सेंटर फ्रेश, सौंफ, इलाइची, आदि ) खाकर घर आने लगे – इसका मतलब ये हो सकता है की वह सिगरेट, शराब आदि पीने के बाद मुंह की दुर्गंध को छुपाना चाहता है.
  2. घर पर जरुरी काम छोडकर बच्चा बिना बताए बाहर चला जाए – बाहर सिगरेट आदि की तलब लगने पर काम को अधुरा छोडकर बहार जाने का मकसद हो सकता है.
  3. बच्चा दूर से आपसे बात करने लगे – इसका मतलब ये हो सकता है की वो अपनी मुंह की दुर्गंध को आपसे छुपाना चाहता है.
  4. बच्चा अपनी उम्र से ज्यादा बड़े लोगों से दोस्ती बढ़ाने लगे – वैसे तो इसका सीधा मतलब नशे से नहीं है मगर, ऐसे में आपको ये ध्यान जरुर रखना है की ऐसा क्या है जो बच्चा अपनी उम्र के बच्चों के बजाय बड़ो के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है. ये बच्चे का नशे की तरफ या गलत संगत की तरफ एक कदम हो सकता है.
  5. रात को किसी दुसरे के घर रुक जाना – अगर बच्चा बहाना बना कर दुसरे के घर रुक रहा है तो इसके पीछे रात को नशा करना भी हो सकता है.
  6.  कोचिंग, ट्यूशन, क्लासेज आदि से छुटने के बाद बच्चा सीधे घर ना जाए – आपको बच्चे के छुट्टी होने और घर पर पहुचने के समय पर ध्यान देना चहिए क्योकि इस बीच बच्चा अगर देरी से आता है तो भी वो नशे की गिरफ्त में हो सकता है.

ये जरुरी नहीं है की बच्चे में उपर बताए गए लक्षण हैं तो वो नशे की गिरफ्त में है. इन बातों को बस एक इशारा समझे और थोड़ी जाँच पड़ताल करें तभी किसी निष्कर्ष पर पहुचें.

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जासूस ना बने, ध्यान रखें ये बातें

बच्चे को हमेशा शक की नज़रों से देखने पर बच्चे पर गलत प्रभाव पड़ता है. पड़ताल करें मगर इस तरह से की बच्चे को पता ना चले. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो बच्चे के मन में ये बैठ जाएगा की आप उसपर विश्वास नहीं करते हैं. बच्चा हमेशा दबाव में रहेगा. इससे उसका शारीरक और मानसिक विकास बहुत ज्यादा प्रभीवित होगा.

ऐसे करें बच्चे की पड़ताल

  • अचानक से किसी बहाने से स्कूल/कॉलेज के छुट्टी होने पर वहां पहुच जाएं. दूर खड़े रहें और देखें की बच्चा कोई गलत काम तो नहीं करता है. अगर बच्चा आपको देख भी ले तो आपके पास कोई अच्छा बहाना होना चाहिए. आप अपने किसी जानकार को भी ये काम दे सकते हैं जिसे बच्चा ना जनता हो.
  • बच्चा हॉस्टल में रहता है तो भी आपको बीच-बीच में वहां बिना उसे बताए चले जाना चहिये, हो सके तो उसके रूम में किसी बहाने से जाएं और वहां रखी सभी चीजों पर ध्यान दें. ध्यान दें की वहां कोई सिगरेट का कोई जला हुआ टुकड़ा तो नहीं पड़ा है, लाइटर या माचिस की तिल्ली, शराब की खाली बोतल, आदि तो नहीं है. ये ध्यान रखें की ये सब आपको नज़र बचा कर करना है. बच्चे को बिलकुल इस बात का पता नहीं चलना चाहिए.
  • बच्चे के टीचर, हॉस्टल का वार्डन और उसके दोस्तों से भी संपर्क बनाएं रखें. इससे भी बच्चे बारे में पता चलता रहेगा.
  • सोशल मीडिया पर बच्चा किस तरह की पोस्ट करता है और कैसी फोटोस डालता है ये भी ध्यान रखें. आजकल बच्चे सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर ही चीजें शेयर करते हैं. कुछ बातें ऐसी होती हैं जो वो आपसे शेयर नही करता है मगर सोशल मीडिया पर शेयर करता है. उसे इस बात के लिए कुछ ना बोलें. बस चुप-चाप से उसकी गतिविधिओं पर नज़र रखें. अगर आपने कभी उसे ये जता दिया की आप उसकी प्रोफाइल पर नज़र रख रहें हैं तो वो वहां पर खुले मन से कुछ पोस्ट नहीं करेगा और आप उसके बारे में करीब से कुछ नहीं जान पाएंगे.

बच्चा अगर गलत चीज़ों में लिप्त पाया जाता है तो उसे प्यार से समझाएं. अगर नहीं मानता है तो थोड़ी सख्ती भी करें. इस जानकारी को शेयर करने का मकसद आपको डरना नहीं है बल्कि आपको ये बताना है की बच्चे को आजादी दें मगर उसपर ध्यान जरुर दें. आपकी थोड़ी सी सावधानी आपके बच्चे का भविष्य सुधार सकती है.

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