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फिर आत्मघाती का गोल कर बैठे राहुल

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फिर आत्मघाती का गोल कर बैठे राहुल

रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली थी। सोनिया गांधी, डॉ मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, भूपेश बघेल, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत सभी बड़े नेताओं ने मोदी सरकार की बखिया उधेड़ दी। अरसे बाद कांग्रेस की यह अपने दम पर विशाल रैली थी। संदेश भी स्पष्ट था। मोदी सरकार अमीर समर्थक, गरीब विरोधी, देश विभाजक है। मगर, सबसे ज्यादा चर्चा किस बात की हुई? सबसे ज्यादा चर्चा हुई राहुल गांधी के भाषण की।

राहुल के भाषण से किसको हुआ नुकसान?

राहुल ने अपने भाषण में कई गम्भीर मुद्दों को उठाया, मगर चर्चा उनकी नहीं हुई। चर्चा हुई राहुल के उस जज्बाती भाषण की, जो उन्होंने मेक इन इंडिया और रेप इन इंडिया वाले बयान के बाद बीजेपी की ओर से माफी मांगे जाने पर दी। राहुल ने कहा कि वे राहुल सावरकर नहीं हैं राहुल गांधी हैं। जाहिर है राहुल ने सावरकर को नकारा और खुद को गांधी से जोड़ा ताकि उन्हें स्वीकारा जा सके। आखिर इससे कांग्रेस को या राहुल गांधी को हासिल क्या हुआ? वास्तव में किसको नुकसान हुआ और किसको फायदा?

असली मुद्दे धरे रह गये

इसमें संदेह नहीं कि राहुल ने यह तुलना इसलिए की क्योंकि वे विनायक दामोदर सावरकर को माफी मांगने वाले नेता के तौर पर पेश करें, जिन्हें बीजेपी भारत रत्न देने की तैयारी में है। यह सच है कि सावरकर ने अंग्रेज सरकार से 9 बार माफी मांगी थी। मगर, इसका दूसरा पहलू भी है जिस वजह से वीर सावरकर की मूर्ति संसद भवन में लगी हुई है। यूपीए सरकार 10 साल तक रही, लेकिन इस मूर्ति हटाने की सोच भी नहीं पायी। क्या राहुल गांधी ने खुद मुद्दे को भटकाने का काम नहीं किया? मोदी सरकार विरोधी तमाम बातें धरी रह गयीं। भारत बचाओ का मुद्दा ‘गांधी बनाम सावरकर’ हो गया।

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शिवसेना के मुंह में उंगली कर गये राहुल

बीजेपी यही तो चाहती रही है। खुद बीजेपी का पसंदीदा विषय रहा है सावरकर। लगातार शिवसेना को वीर सावरकर के नाम पर ही बीजेपी घेरती रही है। राहुल गांधी ने शिवसेना को मजबूर कर दिया कि वे उनके बयान पर प्रतिक्रया दें। शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार चला रहे उद्धव के लिए राहुल ने मुश्किल खड़ी कर दी। करारा जवाब भी मिला। क्या कांग्रेस को इससे फायदा होगा? कतई नहीं। नुकसान शिवसेना और कांग्रेस दोनों को होगा। फायदा बीजेपी को मिलेगा।

खुद को मुद्दा बना बैठे राहुल

‘भारत बचाओ’ के बजाए राहुल गांधी ने खुद को मुद्दा बना लिया। बीजेपी राहुल पर आक्रमण करने लगी। कांग्रेस के नेता राहुल का बचाव करने लगे। जिस मुद्दे पर रैली हुई, जिसके लिए महीनों तैयारियां की गयीं- वह मुद्दा ही हवा हो गया। एक नुकसान खुद कांग्रेस की मेहनत और आंदोलन की तैयारी का हुआ। दूसरा नुकसान बीजेपी को आरोपों से बच निकलने का मौका मिल जाने के रूप में भी कांग्रेस को ही हुआ। तीसरा नुकसान ये हुआ कि राहुल गांधी की ओर उंगली उठी। चाहे विनय दामोदर सावरकर हो या महात्मा गांधी दोनों में किसी भी व्यक्तित्व से राहुल गांधी अपनी तुलना चाहकर भी नहीं करा सकते। इसे देशी भाषा में कहते हैं पूजा-पाठ करके चौथ पूज देना।

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